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जलवायु परिवर्तन : लक्ष्य तो तय हुए, अब कदम आगे बढ़ाना है
Navbharat Times
पर्यावरण और स्वास्थ्य के नजरिए से वर्ष 2021 लंबे समय तक याद किया जाएगा। इस साल हमने मानवता का श्रेष्ठ देखा तो सबसे बुरा भी देखा। साल की शुरुआत कोरोना की दूसरी लहर से हुई।
आसान पहल से दूर हो सकता है मरुस्थलीकरण का संकट
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मरुस्थलीकरण रोकने के लिए वानिकी के माध्यम से खराब मिट्टी में सुधार, पानी के उपयोग की दक्षता को बढ़ाना, मिट्टी का कटाव रोकना और बेहतर कृषि प्रणालियों को अपनाना होगा।
लू से होने वाले नुकसान से बचने के लिए हीट कोड जरूरी
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सरकार हीटवेव को प्राकृतिक आपदा नहीं मानती, इस पर अब गंभीरता से विचार करने की जरूरत है
सांसों में घुलता जहर, क्या चीन जैसी नीति बना सकते हैं हम?
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लगभग हर भारतीय ऐसी हवा में सांस ले रहा है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के वायु गुणवत्ता मानदंडों के अनुसार, असुरक्षित माना गया है
ये दो शहर दुनिया को सिखा रहे बूंदों की संस्कृति
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बारिश का पानी बचाकर और सीवेज के पानी को दोबारा उपयोग लायक बनाकर हम भारतीय शहरों की घरेलू पानी की जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन नहीं, जलवायु प्रलय कहिए
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जलवायु आपातकाल वास्तविक है हमें इसके प्रलय से बचने के लिए वास्तविक कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाना होगा
जलवायु परिवर्तन के लिए निजी क्षेत्र को जवाबदेह बनाना जरूरी
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जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मौलिक रणनीतियां अपनाने का वक्त आ गया है
चुनाव 2019: पर्यावरण के मुद्दों पर राजनीतिक उदासीनता के लिए दोषी कौन
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पर्यावरण को चुनावी मुद्दे बनाने के सवाल पर सिविल सोसायटी लोगों को जागरूक नहीं कर पाई
कूड़े से बिजली बनाने की योजना पर उठते सवाल
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कूड़े से बिजली बनाने वाले संयंत्रों को कचरे के निपटान का चमत्कारी तरीका माना जा रहा है। लेकिन यह विकल्प कितना व्यवहारिक है?
कानून और पर्यावरण की उपेक्षा
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रैट-होल कोयला खदानों से कोयले के सुरक्षित खनन जैसी कोई चीज नहीं है और इसलिए इस पुराने तरीके को तत्काल बंद करना होगा
पर्यावरण के लिए कैसा हो 2019 का एजेंडा
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2019 के लिए एजेंडा स्पष्ट है कि प्रमुख कार्यक्रमों को लागू करने तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए हमें संस्थागत और विनियामक रूपरेखा बनानी होगी
जलवायु कूटनीति का सार
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जलवायु परिवर्तन वार्ता का लक्ष्य “न कोई हारे, न कोई जीते” होना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है

