अजरबैजान के बाकू में हालिया संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP 29) में जो जलवायु वित्तपोषण समझौता हुआ, उससे इतिहास की एक बड़ी प्रसिद्ध बात याद आती है। 1942 में महात्मा गांधी ने क्रिप्स मिशन की आलोचना करते हुए इसके प्रस्ताव को डूबते हुए किसी बैंक में आया ‘एक आने का चेक’ बताया था। दोनों बातों में बस एक फर्क है- महात्मा गांधी ने इस मिशन के प्रस्ताव को एक आने का चेक कहकर रिजेक्ट कर दिया था, जबकि आलोचना के बावजूद कॉप के वित्तपोषण समझौते को भारत सहित कई देशों ने अपना लिया है। यह मंजूरी बताती है कि जलवायु संकट दूर करने में संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) सहित बाकी दुनिया ने जो कोशिशें की हैं, वे बड़े लेवल पर फेल हो गई हैं।